Tuesday, March 30, 2010

थोड़ी शांति मुझे दिलाओ....

ये जीवन है एक अनोखा खेल...
इस खेल में कोई है पास, कोई है फेल...
ये तो भई है मारा मारी की रेल....
भागा दौड़ी से मुझे बचाओ...
थोड़ी शांति मुझे दिलाओ।
बचपन से ही चल रही है नंबर वन की जंग...
क्लास टॉप करने की धमकी देकर करते हैं माता पिता बच्चों को तंग...
टॉप करोगो तो बचाओ...नहीं तो डांट के शिकार बनोगे....
इस टॉरचर से मुझे बचाओ...
थोड़ी शांति मुझे दिलाओ...
कॉलेज में भी नहीं छोड़ा मारा मारी ने मेरा साथ...
ऐसा लगता था पकड़ लिया है अशांति ने मेरा जमकर हाथ...
दाखिले के लिए हैं कुछ सीटे..कौन छोड़े किसको पीछे...
बच्चों का भरमार...सीटों में तकरार...एक अनार सौ बीमार...
इस दुविधा से मुझे बचाओ...
थोड़ी शांति मुझे दिलाओ...
नहीं मिलेगा मुझे सुकून...सारा महौल मेरे प्रतिकूल...
अब आ गई नौकरी की बारी...चल रही थी ज़ोरो शोरो से तैयारी...
पहली नौकरी लगी बड़ी प्यारी...मुझे लगा खत्म हुई मेरी लाचारी...
पर ये तो थी परेशानी की शुरूआत...जिसने सताया मुझे दिन रात...
इस व्यथा से मुझे बचाओ...
थोड़ी शांति मुझे दिलाओ...
- राशी वधावन...

1 comment:

  1. nic n very true in evryone's life!..bhagwan tumhe shanti de!

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